अब जेपी फैक्ट्री के मजदूरों ने विधायक पर बोला हमला कहाँ की जब पूरे लोगो की वापसी नही करवानी थी तो हमारा शोषण क्यों पढि़ए पूरी खबर

अब जेपी फैक्ट्री के मजदूरों ने विधायक पर बोला हमला कहाँ की जब पूरे लोगो की वापसी नही करवानी थी तो हमारा शोषण क्यों पढि़ए पूरी खबर

सतना । जेपी भिलाई सीमेंट के मजदूरों के प्रति संवेदना दिखाने का कई दिनों तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा शुक्रवार को खत्म हो गया। बाबुपुर स्थित प्लांट के सामने से उठ कर कलेक्ट्रेट के सामने आमरण अनशन पर बैठे सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा सुबह जिला अस्पताल में भर्ती हुए और इसके कुछ ही समय के बाद उन्होंने जूस पी कर अनशन खत्म कर दिया। दावा किया गया कि उनकी सभी मांगें मान ली गईं लेकिन हकीकत इसके इतर कुछ ऐसी निकली जिससे साफ हो गया कि मजदूरों का हित भले ही न हुआ हो विधायक की पॉलिटिकल झांकी सज गई। सवाल भी उठ रहे हैं कि जब इतने में ही संतुष्ट होना था , मजदूरों से ज्यादा अपने राजनैतिक हित साधने थे तो फिर

आमरण अनशन का यह ड्रामा क्यों ?

जब सिर्फ 10 मजदूरों को मिलेगा काम तो क्यों था इतना तामझाम

विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने मजदूरों के हित मे लड़ाई छेड़ने का दावा करते हुए ऐलान किया था कि जब तक कंपनी निकाले गए सभी 162 मजदूरों को काम पर वापस नही लेगी, लड़ाई चलती रहेगी। प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने कई दौर की वार्ता की लेकिन तब विधायक 40 मजदूरों की वापसी के प्रस्ताव पर भी राजी नही हुए। विधायक और उनके करीबियों का यही कहना था कि टुकड़ो में बात नही होगी , वापसी तो सभी की करनी होगी। अगर टुकड़ो में वापसी करना है तो भी संख्या 100 से कम तो नही ही मानी जाएगी। लेकिन अचानक मजदूरों के प्रति विधायक का यह प्रेम कम हो गया और वे सिर्फ 10 मजदूरो की तत्काल वापसी और 40 की वापसी की प्रत्याशा पर सहमत भी हो गए। गौरतलब है कि कंपनी प्रबंधन की तरफ से एसडीएम रघुराजनगर को दिए गए जिस पत्र को विधायक के आंदोलन का विजय पत्र बताया जा रहा है अगर वह सही है तो उसमे कंपनी ने 10 अभी और 40 बाद में कुल 50 मजदूरों को ही वापस लेने का आश्वासन मात्र दिया है। यानी विधायक की न तो सब की वापसी की कोई शर्त मानी गई और न ही पहली खेप में कम से कम 100 लोगों को वापस लेने पर प्रबंधन ने सहमति जताई। सवाल यह उठता है कि जब मामला इतने में ही सेटल कर लेना था तो फिर इतने दिनों तक आंदोलन और अनशन का ड्रामा कर मजदूरों की भावनाओं से खेलवाड़ आखिर क्यों किया गया ? क्या अब अनशन का फैसला खुद विधायक पर ही भारी पड़ने लगा था और उनका मकसद मजदूरों की नौकरी वापस दिलाने से कहीं ज्यादा किसी तरह अनशन खत्म करवाना था ?

खुद चाहते थे खत्म करा दिया जाए अनशन

सूत्रों की मानें तो विधायक ने ताव – ताव में आमरण अनशन का ऐलान तो कर दिया और फिर बैठ भी गए लेकिन उसके बाद कोशिशें यह ही होती रहीं कि जल्द से जल्द अनशन खत्म करा दिया जाए। सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक अफसरों से गुरुवार को ही इस संबंध में विधायक और उनके लोगों ने चर्चा कर अनशन खत्म कराने की पटकथा पर काम शुरू कर दिया था। कल तक त्रिपक्षीय वार्ता में कलेक्टर को ही बुलाये जाने की मांग पर अड़े रहने की बातें करने वाले विधायक शुक्रवार को उसी पटकथा के अनुसार सुबह जिला अस्पताल पहुंच गए और जूस पी कर अनशन तोड़ दिया। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि विधायक ने इस सम्बंध में राज्यमंत्री राम खेलावन पटेल से भी आग्रह किया था। मंत्री आते ,अनशन तुड़वाते तो झांकी और भी रंगीन सजती लेकिन ऐसा हो नही पाया।

खूब हुई थी बयानबाजी ,चला था आरोप प्रत्यारोप का दौर

विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने खुद को मजदूरों का सबसे बड़ा हितैषी होने का प्रचार करते हुए इस दौरान बातें भी बड़ी बड़ी की लेकिन बाद में खुद उनके ही दावों की हवा निकल गई। फ्लॉप हो गए आंदोलन को कामयाब प्रचारित कराने का प्रयास शुरू कर दिया गया जबकि विधायक की मांगें पूरी हुए बिना उन्होंने अनशन खत्म कर दिया। गौरतलब है कि इस मामले में सांसद गणेश सिंह ने पहले भी कुछ ऐसा ही कहा था जैसा अब विधायक के समर्थकों द्वारा जारी किए जा रहे अपने विजय पत्र में लिखा गया है। लेकिन तब सिद्धार्थ कुशवाहा मर्यादा भूल कर निजी हमलों पर उतर आए थे। उन्होंने खुद को साफ पाक प्रचारित करते हुए सांसद के दामन पर कीचड़ उछालने का प्रयास किया था । लेकिन अब जब मजदूरों के हित की बात के उनके खुद के ही दावे औंधे मुंह गिर पड़े हैं तो पहले से ही उन पर उठ रही उंगलियों की तादाद बढ़ गई है। मजदूर खुद सवाल उठा रहे हैं कि जब यही करना था , सिर्फ 10 पर ही समझौता करना था तो हमारी भावनाओ से खेलवाड़ क्यो किया गया ? अगर 10 लोगों को कंपनी ने वापस रख भी लिया तो 152 शेष मजदूरों का क्या होगा ? और इतने लोंगो के वापसी के लिए फैक्ट्री प्रबंधन तो पहले ही राजी था अब विधायक के नेतागीरी के चलते बाकी मजदूरों के दरवाजे तो अब हमेशा के लिए बंद हो गए विधायक ने मजदूरों के नाम पर सिर्फ राजनीति की और कुछ भी नही

अपने ही बयानों पर कैसे घिरे विधायक

अब शहर मे चर्चा का बाजार इस बात पर गर्म हो गया है कि जो आरोप विधायक सासंद के ऊपर लगाए तो कही पर्दे के पीछे विधायक ने भी तो खेल नही कर लिया और फैक्ट्री प्रबंधन से अपना हित साध लिया क्योंकि सासंद ने भी तो यही बयान दिया था कि फैक्ट्री को चालू रखना चाहिए तभी तो मजदूरों की वापसी हो पाएगी लेकिन विधायक को यहाँ बर्दाश्त नही हुआ और विधायक ने सासंद को फैक्ट्री का हिमायती बता डाला लेकिन अब लोग भी यही कह रहे है कि विधायक जी जब मजदूरों की वापसी नही करानी थी तो मजदूरों का शोषण करना की जरूरत क्या थी

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